शाम के ५ बजे, हाथ में डाक लेकर हम तीनो 'शेफाली स्वीट्स' के सामने चबूतरे पर बैठे थे! हम सब ने एक प्रवेश परीक्षा दी थी आज उसी का परिणाम आना था! वायदे के मुताबिक अखिल को डाक सबसे पहले हमारे सामने खोलनी थी क्यूंकि जितना विश्वास अतुल और मुझे अपने न सेलेक्ट होने का था उतना ही अखिल के सेलेक्ट होने का! अखिल को हमारे बारे में सब पता था जब मैं और अतुल क्लास बंक मारकर सीधा शेफाली पर आते तो वो चबूतरे पर आकर हमें बड़े भाई कि तरह पढाई करने की सीख देता! खैर हम सीखने वालो में से कहा थे! खयालो कि दुनिया से मुझे बाहर निकलते हुए अतुल ने मेरा हाथ झंझोड़ा क्यूंकि अखिल अब डाक फाड़ रहा था! अखिल का ३५० रैंक आया था और टोटल सीट ५०० थी! यह देखते ही अतुल रहीम चाचा के पास गया और उसने केक का आर्डर कर दिया वोह भी अखिल का फेवरेट चॉकलेट केक! सीना गर्व से चौरा हो रहा था क्यूंकि लाखो लोगो में अपने जिगरी ने इतना रैंक मारा है उसके मार्क्स देख कर विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने ज्यादा मार्क्स के बाद भी उसका ३५० रैंक आया है! अखिल उत्सुक होकर जल्दी जल्दी रिजल्ट और मार्क्स देख रहा था! मैंने चिल्ला कर कहा, " रहीम चाचा ३ प्लेट फलूदा भी बना दो!" रहीम चाचा ने वही घीसा पीटा जवाब दिया, "शैतानो पिछला उधार भी चूका दो!" अतुल उन्हें समझने लगा कि अब अपना अखिल बड़ा आदमी बन गया है और आपके सारे उधर सूत समेत वापस कर देंगे और इनाम भी देंगे आपके असीम प्यार का!
मैंने चाचा से नजर हटाकर जैसे ही अखिल कि और देखा तो पाया कि अखिल कि आँखों से आंसू टपक रहे है! बेवकूफ के ख़ुशी के आंसू भी ऐसे आ रहे थे जैसे उसका सिलेक्शन न हुआ हो और वोह रो रहा हो! मैंने कंधे पर हाथ रख उसकी ख़ुशी बांटनी चाही तो उसने रुँआसी हालत में रिजल्ट मेरे हाथ में दे दिया! मैंने पुरे रिजल्ट पर नजर मारी तो सब समझ आ गया! अखिल के आंसू ख़ुशी के नहीं थे, वो तो उसी बात के थे जो मैं सोच रहा था! उसके रिजल्ट्स में नोट सेलेक्टेड लिखा था! पूरा पढ़ा तो पता चला कि रिजर्वेशन के चलते ५०० कि टोटल सीट में से २५० सीट ही जनरल केटेगरी कि थी! हमारी हालत देख अतुल फलूदा लिए हमारे पास आया जब उसे पता चला कि अखिल का सिलेक्शन नहीं हुआ है तो वो चुपचाप उसके कंधे को सहारा देकर बैठ गया! न जाने कितनी देर तक हम चबूतरे पर बैठे थे कि तभी अतुल कि मोबाइल कि घंटी बजी! घर से फ़ोन आया था! वो बिना बोले घरवालो कि बात सुन रहा था! फ़ोन कटते ही उसकी आँखे नाम हो गयी, इतने में रहीम चाचा केक लाकर रख चुके थे! हमारी हालत देख उन्होंने पैसे दोबारा माँगना जायज नहीं समझा! फिर काफी चुप्पी का माहौल बन गया! नाम आँखों में रुदन स्वर में बहुत देर बाद अतुल कुछ बोला, उसके शब्द सुनकर मैं तो स्तब्ध रह गया पर अखिल ने हिम्मत दिखाते हुए सामने पड़ा केक काट कर अतुल को खिलाया और उसे बधाई दी! हम तीनो रो रहे थे और ख़ुशी-गम के असमंजस में थे! मुझे समझ नहीं आ रहा था कि रिजर्वेशन सिस्टम सही है या गलत क्यूंकि अतुल यादव ओ. बी. सी. कोटे से जहाँ कम अंको के बावजूद परीक्षा उतीर्ण करते हुए सेलेक्ट हो चूका था वही एक हुनर उससे कही अधिक अंक लेकर टूटा सा जान पड़ता था!

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