अब सच बोलने से डर लगता है
कही किसी को बुरा न लग जाये
कही किसी को पता न चल जाए
कही कोई मुझे गलत न समझ ले
और कही उसके नतीजे मेरे खिलाफ न जाए
मेरे जज्बात मेरे आभास कही मुझे अपनों से दूर न कर दे
और कही उन अपनों से जो अभी मेरे हो भी न पाए है
कही उन अपनों से जो मेरे सबसे करीब होने वाले है
सच में डर गया हूँ
बहुत डर लगता है की कही मेरे न बोलने से वो मुझसे दूर तो नही हो जायेंगे
कही मेरे बारें में गलत सोच तो न धारण कर लेंगे
कही मैं उन्हें बदला हुआ न लगु
कही मैं उन्हें कमजोर न लगू
कही मेरे एक्सप्रेशंस मुझे कमजोर न साबित कर दे
कही मेरे मुंह से निकले शब्द वापस न हो पाए
बहुत डर गया हूँ
मेरी सोच सामने वाले को बदलने पर मजबूर न कर दे
कही वोह बदल जाए तो मेरा यह कहना "जैसे हो वैसे रहो" का गुरुर ख़तम न कर दे
कही उसके न चूर होने वाले सपनो को चूर चूर न कर दे
मैं बदलना नहीं चाहता
मैं कमी निकलना नहीं चाहता
मैं बताना भी नहीं चाहता की मुझे बुरा लगा या नहीं
पर सर पीर एक बोझ होता है जो हल्कता करना चाहता हूँ
इसके लिए नहीं की वोह मुझसे दूर हो जाए
इसलिए की कही वोह मुझसे दूर न रह जाए
पर कभी दुसरे की इतनी गलती बताने से वोह भी परेशान हो गया तो
उसको भी बहुत दर्द अपनी पहचान पर हो गया तो
यही सोचकर की वोह भी मेरी तरह इंसान है
मेरी ही तरह उसमे भी बुरा मान सकने वाली जान है
होंठ सिये जाता हूँ
पर जब कभी अनजाने में हुई हुस्ताखी पर कोई बुरा मान जाए
भी वोह बात घूम घूम कर आये
एहसास हो की तुम्हारा साथी तुम्हे समझ नहीं पा रहा
सच यही होगा की मैं उसे कही समझ नहीं पा रहा
वोह हमराह है तभी हर पल में मेरे साथ है
यह भी सच है की उसके कई जज्बात है
पर जिद और धरना का यह करम है
जिसने दिल में दल एक वहम है
कि होठ सिये जाता हूँ
बस विश्वास हो की वोह बुरा न मानेगा
मेरे शब्दों से मेरे व्यक्तित्व को नहीं जानेगा
छोड़ेगा तो नहीं पर विश्वास कर मेरे को मानेगा
तो मेरा हमराही तब कही मेरी बात जानेगा
वोह जान मेरे दिल की जान है
पर हम दोनों की डिमांड जब एक दुसरे के हाल से अनजान है
तभी दिल दुःख जायेगा किसी बात का
सिर्फ एहसास बुलंद हो एक दूजे के साथ का
तभी वो बयान हाले-दिल कर पायेगा
जब उसके जज्बातों का समुन्दर मेरे दिल में उतर जायेगा
तब भी उसके व्यक्तित्व का मजाक न बनाऊंगा
उसे मान अपने पास दिल के गले लगाऊंगा
वोह बदलेगा मैं भी बदल रहा हूँ
वक़्त के खेल को उसके साथ समझ रहा हूँ
कि साथ जो रह रहे है तो दुसरे से सब आशा है
वो पूरी न हो तो भी न कोई निराशा है
शायद होंठ बंद है
पर कलम चल रही है
न जाने वोह वार किधर कर रही है
पर कलम सही चली तभी होगी
जब शब्दों से बढ़ी दूरी कलम के एहसास से दूर होगी
सच यह है की जब कभी मुझे उसमे कोई कमी नजर आती है
हर दम कमी उसमे नहीं मुझी में कही आती है
वोह तो मेरा प्रतिबिम्ब है मेरा, मेरे अधोरे शरीर का पूर्ण आधार है
धुंडने को तो हर बात में १०० कमियों का भण्डार है
पर क्या अपने दाए हाथ में कमी निकलना बाए हाथ का प्यार है
शीशे में सचे दिल से झांक कर जब कलम ने सच कहा
उसके दो शब्द, दो पल की रिएक्शन को उसका व्यक्तित्व जान मैंने उसको गलत साबित कर दिया
पर दो पल की बात पर गलत साबित करने के चक्कर में गलत खुद ता-उम्र हो गया
वोह मेरी जान मेरा प्यार मेरा आधार है
उस से मुझे इतना ज्यादा प्यार है
की दो पल की बात में बुरा न मनु तो मेरे प्यार का इज़हार है
और बदलेंगे तो हम दोनों ही क्यूंकि एक दुसरे के साथ रहना कही दिल के किसी कोने का सपना साकार है
होंठ सिले थे की कही बुरा न लगे
कलम लिख रही थी की बुरा हो क्या रहा है
अब लफ्ज़ खुलेंगे, इज़हार करेंगे,
तेरे में कमी निकलने से पहले,
अपनी इस कमी निकलने की कमी को हम दूर करेंगे
कही किसी को बुरा न लग जाये
कही किसी को पता न चल जाए
कही कोई मुझे गलत न समझ ले
और कही उसके नतीजे मेरे खिलाफ न जाए
मेरे जज्बात मेरे आभास कही मुझे अपनों से दूर न कर दे
और कही उन अपनों से जो अभी मेरे हो भी न पाए है
कही उन अपनों से जो मेरे सबसे करीब होने वाले है
सच में डर गया हूँ
बहुत डर लगता है की कही मेरे न बोलने से वो मुझसे दूर तो नही हो जायेंगे
कही मेरे बारें में गलत सोच तो न धारण कर लेंगे
कही मैं उन्हें बदला हुआ न लगु
कही मैं उन्हें कमजोर न लगू
कही मेरे एक्सप्रेशंस मुझे कमजोर न साबित कर दे
कही मेरे मुंह से निकले शब्द वापस न हो पाए
बहुत डर गया हूँ
मेरी सोच सामने वाले को बदलने पर मजबूर न कर दे
कही वोह बदल जाए तो मेरा यह कहना "जैसे हो वैसे रहो" का गुरुर ख़तम न कर दे
कही उसके न चूर होने वाले सपनो को चूर चूर न कर दे
मैं बदलना नहीं चाहता
मैं कमी निकलना नहीं चाहता
मैं बताना भी नहीं चाहता की मुझे बुरा लगा या नहीं
पर सर पीर एक बोझ होता है जो हल्कता करना चाहता हूँ
इसके लिए नहीं की वोह मुझसे दूर हो जाए
इसलिए की कही वोह मुझसे दूर न रह जाए
पर कभी दुसरे की इतनी गलती बताने से वोह भी परेशान हो गया तो
उसको भी बहुत दर्द अपनी पहचान पर हो गया तो
यही सोचकर की वोह भी मेरी तरह इंसान है
मेरी ही तरह उसमे भी बुरा मान सकने वाली जान है
होंठ सिये जाता हूँ
पर जब कभी अनजाने में हुई हुस्ताखी पर कोई बुरा मान जाए
भी वोह बात घूम घूम कर आये
एहसास हो की तुम्हारा साथी तुम्हे समझ नहीं पा रहा
सच यही होगा की मैं उसे कही समझ नहीं पा रहा
वोह हमराह है तभी हर पल में मेरे साथ है
यह भी सच है की उसके कई जज्बात है
पर जिद और धरना का यह करम है
जिसने दिल में दल एक वहम है
कि होठ सिये जाता हूँ
बस विश्वास हो की वोह बुरा न मानेगा
मेरे शब्दों से मेरे व्यक्तित्व को नहीं जानेगा
छोड़ेगा तो नहीं पर विश्वास कर मेरे को मानेगा
तो मेरा हमराही तब कही मेरी बात जानेगा
वोह जान मेरे दिल की जान है
पर हम दोनों की डिमांड जब एक दुसरे के हाल से अनजान है
तभी दिल दुःख जायेगा किसी बात का
सिर्फ एहसास बुलंद हो एक दूजे के साथ का
तभी वो बयान हाले-दिल कर पायेगा
जब उसके जज्बातों का समुन्दर मेरे दिल में उतर जायेगा
तब भी उसके व्यक्तित्व का मजाक न बनाऊंगा
उसे मान अपने पास दिल के गले लगाऊंगा
वोह बदलेगा मैं भी बदल रहा हूँ
वक़्त के खेल को उसके साथ समझ रहा हूँ
कि साथ जो रह रहे है तो दुसरे से सब आशा है
वो पूरी न हो तो भी न कोई निराशा है
शायद होंठ बंद है
पर कलम चल रही है
न जाने वोह वार किधर कर रही है
पर कलम सही चली तभी होगी
जब शब्दों से बढ़ी दूरी कलम के एहसास से दूर होगी
सच यह है की जब कभी मुझे उसमे कोई कमी नजर आती है
हर दम कमी उसमे नहीं मुझी में कही आती है
वोह तो मेरा प्रतिबिम्ब है मेरा, मेरे अधोरे शरीर का पूर्ण आधार है
धुंडने को तो हर बात में १०० कमियों का भण्डार है
पर क्या अपने दाए हाथ में कमी निकलना बाए हाथ का प्यार है
शीशे में सचे दिल से झांक कर जब कलम ने सच कहा
उसके दो शब्द, दो पल की रिएक्शन को उसका व्यक्तित्व जान मैंने उसको गलत साबित कर दिया
पर दो पल की बात पर गलत साबित करने के चक्कर में गलत खुद ता-उम्र हो गया
वोह मेरी जान मेरा प्यार मेरा आधार है
उस से मुझे इतना ज्यादा प्यार है
की दो पल की बात में बुरा न मनु तो मेरे प्यार का इज़हार है
और बदलेंगे तो हम दोनों ही क्यूंकि एक दुसरे के साथ रहना कही दिल के किसी कोने का सपना साकार है
होंठ सिले थे की कही बुरा न लगे
कलम लिख रही थी की बुरा हो क्या रहा है
अब लफ्ज़ खुलेंगे, इज़हार करेंगे,
तेरे में कमी निकलने से पहले,
अपनी इस कमी निकलने की कमी को हम दूर करेंगे

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