अपरिवर्तित अस्तित्व

इस बदलते समाज में भले ही हम अंग्रेजी की तरफ़ कितना भी आस्कत हो जाए पर हमारा मूल ह्रदय हिन्दी में ही वार्तालाप करेगा! यह ब्लॉग मेरे उसी मूल अस्तित्व को समर्पित है!

Monday, December 24, 2012

तब भी मैं था आज भी मैं हु

जमीन के ऊपर आसमान पर मैं बादलो को ताका करता था,
बादलो के बीच में भटक रहे जहाज़ को अलविदा कहने के लिए !
जहाज़ से अलविदा कह रहा हु बदलो में ताकते हुए,
किसी जमीन से जाहज को  ताकने वाले के लिए!!

तब भी मैं था आज भी मैं हु पर कुछ बदला जरुर है बदलने के लिए

सुबह रिक्शा में स्कूल जाते हुए कार को देखा करता था,
कार में बैठे कही जा रहे थे जिंदगी को जीने के लिए!
जिंदगी की रोज़ सुबह कार से ऑफिस को जाता हु,
घर  से स्कूल जाने वाली रिक्शा की बेहतरी के लिए!!


तब भी मैं था आज भी मैं हु पर कुछ बदला जरुर है बदलने के लिए

हफ्ते के 10 रुपए खरचता टॉफी चॉकलेट खाने पर,
बनिया खूब हिसाब लगता बचे पैसे वापिस देने के लिए!
सब पैसो का हिसाब लगाकर बनिया बन मैं बैठा हु,
हफ्ते के 10 रुपए बचाता हु टॉफ़ी चॉकलेट लाने  के लिए !!

तब भी मैं था आज भी मैं हु पर कुछ बदला जरुर है बदलने के लिए 

दुनिया की भीड़ में आगे से आगे जा रहा हु ,
पीछे माँ बापू को गौरवान्वित करने के लिए !
गौरवान्वित माँ बापू की तरह पीछे खड़ा रहूँगा ,
दुनिया की भीड़ में अपने बेटे को धूधने  के लिए !

आज भी मैं हु तब भी मैं होऊंगा पर कुछ बदल जरुर जाएगा बदलने के लिए