मैंने अपने पहले ब्लॉग मे एक असाधारण यात्रा के बारे मे बताया था, वैसा सा ही संयोग एक बार दोबारा हुँआ है! ये घट्ना है मेरे भाई के विवाह से पुर्व हो रहे रोके कि रसम के उपरांत मेरी मुंबई वापसी की! वैसे तो जब कभी आदमी का दिन खराब होता है तो हो रहे सब संयोगमात्र उसे गलत ही लगते है! वैसे ही घटित संयोगों को मै क्रमांक सहित लिख रहा हूँ:
समय : ५:०० सांय
दिनांक : २५-०५-१०
स्थान : इंद्रापुरम
- मै थका-हारा ओख्ला से वपिस अपने भाई के घर आकर बैठा था! मेरी बहने श्रुति और तप्पी भजनपुरा से फोन करके घर आने को कहती है! मै उन्हे मना कर देता हुँ क्योंकि अभी मै थक गया था और रात्रि में मेरे भाई ’अंकदीप’ ने अपने मित्रों के साथ एक सामुहिक गोष्ठी आयोजित की थी! शाम को वीभु आता है और बताता है कि आज उसका व्रत है! और फिर मेरा भाई घोषित करता है कि गोष्ठि स्थगित कर दी गयी है! मैने सोचा ना तो party हुई और न ही मै अपनी बहन के घर जा सका!
- बातों ही बातों में रात के नौ बज गये और मै बिस्तर पर सोने चला गया क्योंकि प्रातः ५:२५ पर मेरी मुम्बई की Flight थी! तभी मेरे भाई का मित्र वहां आ गया और अनंत काल तक चलने वाला सम्वाद अर्थात ’भारतीय स्वरुप में परिवर्त्न’ की चर्चा शुरु हो गयी! इसी बीच मेरा भाई अपनी होने वाली संगिनी के साथ Mobile पर व्यस्त था! इसी सब मे रात के ११ बज गये और हम भारत को उसकी हालत पर छोडकर सोने चले गये लेकिन मेरे भाई का अपनी संगिनी के साथ संवाद देर रात तक चलता रहा! अतः मेरे भाई ने अपने Mobile को Silent Mode पर कर दिया ताकि मेरी निन्द्रा मे विघ्न न पडे! सुबह वही हुआ निन्द्रा मे विघ्न नही पडा और हम सोते रह गये अर्थात Flight छूट गयी!
- जब सुबह ५:५० पर आँख खुली तो हमारा गहन शोध चालू हो गया कि हमारे विश्वसनीय Alarm कहां चले गये? खैर ऐसी परिस्थिति मे मै गाने गाता हूँ और मेरा भाई ‘You can put the blame on me’ वाला संगीत क्योंकि वो बचपन से ही जिम्मेदाराना है और मै तो ........! हमने Airlines को फोन किया तो उसने बताया कि Fresh Flight Book करनी पडेगी और Missed Flight के रु ५०० आपको refund मिल जायेंगे! मैने अपने शुभचिंतकों से पता किया तो सभी ने बताया कि यही एक रास्ता है अर्थात रु ६००० का चुना!
- दुर्भाग्य इतना स्थिर था कि लगा रु ६००० का नुक्सान तो नही झेल पायेगा तो निश्चय किया गया कि ट्रेन से जाया जायेगा! हम दोनो भाई स्टेशन पहुँच गये और Railway मे हुये नवीनतम नियम बदलावों का उपयोग भी किया पर सब व्यर्थ रहा! हमे Auto Driver ने एक जगह बतायी जहाँ निश्चित रुप से टिकट मिलता, हम उधर गये तो वो एक Reservation Counter था, मेरा मतलब Reservation की वहां Line थी, नही नही लम्बी Line थी, अजी Line क्या जमावडा था लोगो का, पुरे हॉल में ठसाठस भरे हुए थे! सारांश में माहौल ये था कि Reservation Counter जिस Hall मे था वो पुरा भरा हुआ था और उस Hall मे Entrance के लिये Line लगी हुई थी! तो हमारे साथ वही हुआ दुर्भाग्य अपराजिता और हमे टिकट नही मिला!
- कोई नही जहाँ चाह वहाँ राह और नुकसान झेलने की शक्ति बढा कर मैने नयी Flight बुक कर दी! और मेरा भाई हर रोज की तरह Office चला गया और मुझे कह गया कि मै आज अपनी बहन के यहाँ सामान लेकर चला जाऊँ! मैने भी जिंदगी के सूत्र Move On को अपनाया और निकल पडा अपने दो लबादो को उठाकर! Auto मे मैने अपने मित्र ’विश्वास’ से बात की, जिसने कई जगहों से सुनिश्चित करके बताया कि Flight छूट जाने पर Airport पहुँच कर थोडी सी अधिक धनराशि का भुगतान करके अगली Flight पकडी जा सकती थी! ये सुनिश्चित खबर सुन कर शुभचिंतकों पर गुस्सा आ रहा था और ना होने वाले नुकसान को करके अपनी किस्मत पर मुस्कुराहट!
- अब मै ये उल्टफेर करता हुआ कि नुकसान से कैसे बचा जाये, Auto से उतर गया, Metro की चार लाईन बदल गया और आन्नद विहार से सीलमपुर पहुँच गया! उधर जाकर मैने भजनपुरा का Auto किया! Auto मे बैठते ही मेरे होश उड गये, मै सकपका सा गया! Auto से बाहर निकला और गुस्से मे एक पत्थर पर जोर से लात मारी! फिर मैने अपने भाई को फोन किया और बोला कि आज का दिन ही खराब है! उसने भी मुझे डाँटकर फोन रख दिया! दरअसल मै जिस Auto मे ईंदरापुरम से आन्नद विहार आ रहा था उसमे अपना सामान छोड आया था! दुर्भाग्य का छ्टा खेल!
- अब फिर से Move On बोला गया और प्यार से Chill! भजनपुरा पहुँचने वाला था कि मेरे भाई का फोन आया और उसने मुझे सान्तवना दी! उसे गुस्सा आ रहा था तो इस बात का कि इतने नुकसान के बाद भी मै विषाद क्यों नही प्रकट कर रहा! अचानक जोर से आवाज आई और मेरा फोन बन्द हो गया! ज्यादा मत सोचिए मेरे बाजू मे एक स्कूटर लडखडा कर गिर गया था और मेरे मोबाईल की Battery खत्म हो गयी थी! मैनें स्कूटर वाले को उठाया और बोला कि ’तेरी गलती नही है मेरा दिन ही ऐसा जा रहा है!’ और ये बोल कर मै सीधा अपनी बहन के घर पहुँचा और किस्मत के ७ खेलों के बारें मे सोच रहा था!
- अब पुरी शाम कुछ नही हुआ! अपने घर मैने Flight छूटने की बात बतायी पर सामान खोने की नही क्योकिं ये पता चलते ही घर का वातावरण खराब हो जाता! इसलिए निश्चय हुआ कि कुछ दिनों में बात बतायी जायेगी! पहली बार घर से कुछ जान कर छिपा रहा था तो आत्मग्लानि भी हो रही थी! रात्रि मे मेरा भाई भी ऑफिस से घर आ गया और तुरंत बाद घर से फोन भी! तभी मैने न जाने क्यों सब कुछ अपनी माँ को बोल दिया! मेरे पास सरल सा उपाय था कि मै नुकसान पर विषाद करता और मेरे माँ-बाप मुझे प्यार से खो चुके सामान को भुल जाने कि सान्तवना! पर नही हम तो गान्धी जी के भक्त है और उल्टा समझाया गया कि जो हो गया सो हो गया! फलस्वरुप जो गान्धी जी के साथ हुआ था वैसा ही दूरभाष पर मेरे साथ भी हो गया! किस्मत का ८वां झांपड!
- अब जैसा आपके लिये पडना कठिन हो रहा है वैसे मेरे लिये जागना अतः इस रात्रि को भी ठीक ११ बजे मै सो गया! आप सही सोच रहे है मेरी Flight आज miss नही हुई बल्कि मै दो घन्टे बाद जागा और १ बजे से जागता ही रहा! सुबह-२ ३:३० बजे मेरा भाई और मोसेरा भाई मुझे Airport तक Alto से छोडने गये! वो मेरी किस्मत पर मेरे मजे ले रहे थे कि सोने पर सुहागा करने के लिये Police ने हमे रोक लिया! खैर हमने मौसेरे भाई से पुछा तो वो बोला सब कागजात पुरे है! मेरे दिल को खुशी हुई और लगा वाकई अगले दिन Life Move On हो चुकी है! परंतु तभी आभास हुआ कि गाडी का Insurance घर पर है और तभी मेरी किस्मत पर मेरे मजे लेने वाले भी मेरी चपेट मे आ गये!
- खैर जैसे तैसे मैने Flight पकडी और सोचता रहा कि इसका आज Accident हो जायेगा क्योंकि मेरे दिन ही खराब चल रहे है! Accident तो नही हुआ तो इस बात पर मै मुम्बई पहुँच कर Flight से Terminal पर तक पहुँचाने वाली Bus मे भगवान का शुक्रिया कर रहा था कि Bus खराब हो गयी! सब लोग नयी Bus का इंतजार करने लगे और मै ११ वें हादसे का!
- शुक्र है ११वां हाद्सा कुछ भी नही हुआ मै सही-सलामत घर पहुँच गया और सोते वक्त सोचता रहा कि कितना और कुछ हो सकता था जो नही हुआ! सुबह जब ऊठा तो मेरा कन्धा अकडा चुका था! आज उस अकडन को दो दिन हो गये है और आप विश्वास करे या ना करे मेरा मित्र शिवमणी अनायास ही सिद्धीविनायक का प्रसाद लेकर आया है, जो मै अब खा रहा हूँ! शायद गणेशजी कुछ कृपा करे!
