अभी अभी मामाजी ने हिन्दी ब्लॉग के बारे में बताया, तो मैंने सोचा क्यों न पहला मातृभाषा में ब्लॉग टाईप किया जाए! लेकिन मुझे अब ज्ञात हुआ कि हिन्दी में लिखना कितना कठिन हैं! इसलिए मैं अपना पहला लेख यही समाप्त करता हूँ!
धन्यवाद!
अपरिवर्तित अस्तित्व
इस बदलते समाज में भले ही हम अंग्रेजी की तरफ़ कितना भी आस्कत हो जाए पर हमारा मूल ह्रदय हिन्दी में ही वार्तालाप करेगा! यह ब्लॉग मेरे उसी मूल अस्तित्व को समर्पित है!
Saturday, March 7, 2009
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